आज छुट्टी का दिन था | रविवार
आज ख़ास कुछ नहीं कर पाया , शायद यूँ ही समय नष्ट करता रहा |
लेकिन अंत में राम प्रसाद बिस्मिल जी की आत्मकथा का एक पन्ना पढने में कामयाब हो ही गया जो हमेशा से प्रेरणा प्रद होता है |
हम सभी को अपने को योग को एक बार पूरी तरह से समर्पित कर देना चाहिए |
अगर हर व्यक्ति योग की क्रियाओं पर अपना अधिकार कर ले तो वो जीवन में जो चाहे हासिल कर सकता है |
हम सभी लोग बिना बात की बातों में ही अपने अमूल्य जीवन को बर्बाद करने में लगे रहते है और उसी में ही आनंद लेकर तल्लीन रहने की चेष्टा करते रहते है , जीवन का सुख इन सब आलापों में नहीं है ये नहीं समझते |
अभी ये बिना बात की बातें कौन सी है :
१. सिनेमा देखना
२. व्यर्थ की बातें करना
३. टीवी पर उलटे सीधे धारवाहिक देखना और उसके बाद उनके विषय में बात करके समय बर्बाद करना
४. हमेशा खाने पीने के बारे में सोच कर अपना समय नष्ट करना
५. खाली समय हो तो उसको बिना बात की किताबो या अक्ख्बार की खबरों को पढ़ कर बिता देना
६. व्यर्थ की चिंता करना अनिष्ट की आशंका को लेकर
इसी तरह की और भी बहुत सी बातें हो सकती है , जिनमे हम सभी लोग तल्लीन रहते है |
हम सभी को अपने को योग को समर्पित करके योग की कठिन क्रियाओं का अभ्यास करके देखना चाहिए |
आज जो मैंने पढ़ा अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल जी के गुरु जी के विषय में :
"चाचियों तथा चचाजात भाईयों के व्यवहार से आपको बड़ा क्लेश होता था । इसी कारण से आपने विवाह न किया । घरेलू दुर्व्यवहार से दुखी होकर आपने घर त्याग देने का निश्चय कर लिया और एक रात को जब सब सो रहे थे, चुपचाप उठकर घर से निकल गये । कुछ सामान साथ में लिया । बहुत दिनों तक इधर-उधर भटकते रहे । भटकते-भटकते आप हरिद्वार पहुँचे । वहाँ एक सिद्ध योगी से भेंट हुई । श्री ब्रजलाल को जिस वस्तु की इच्छा थी, वह प्राप्त हो गई । उसी स्थान पर रहकर श्री ब्रजलाल ने योग-विद्या की पूर्ण शिक्षा पाई । योगिराज की कृपा से आप 15-20 घण्टे की समाधि लगा लेने लगे । कई वर्ष तक आप वहाँ रहे । इस समय आपको योग का इतना अभ्यास हो गया था कि अपने शरीर को आप इतना हल्का कर लेते थे कि पानी पर पृथ्वी के समान चले जाते थे । "
"आपने कहा था, मेरा योग भ्रष्ट हो गया । प्रयत्न करूंगा, मरण समय पास रहना, मुझ से पूछ लेना कि मैं कहाँ जन्म लूंगा । सम्भव है कि मैं बता सकूँ ।"
मैंने आज तक जब भी कोई अच्छी बातें या किताब ये वेब पेज पढ़ा है तो उसमे येही पाया है की योग से आदमी असाध्य को भी साध लेता है , योग में ही वो शक्ति है जो और कहीं भी मुझको नहीं दिखाई देती |
स्वामी विवेकानंद के बारें में थोडा सा पढ़ा है , उन्होंने भी जीवन में योग के द्वारा ही काफी कुछ हासिल किया था , अभी पढ़ा अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल जी के विषय में |
और बाकि मेरे अपने गुरु स्वामी रामदेव जी तो सम्पूर्ण योगी है ही |
इसके अलावा मैंने अभी यहाँ अपने अमरीका प्रवास के दौरान ही आचार्य श्री राम शर्मा का जीवन वृतांत भी पढ़ा था और उन्होंने भी योग व् गायत्री मंत्र के माध्यम से बहुत कुछ साध लिया था जीवन में |
इसलिए ही ये कहा है की :
योग में बड़ी ही शक्ति है , करो योग रहो निरोग