मित्रों क्या इस स्वतंत्रता दिवस पर हमको ये विचार नहीं करना चाहिए कि हम कितने स्वतंत्र है आज |
क्या हम आज भी गुलामी के बेड़ियों में जकड़े नहीं है ?
कौन कौन सी गुलामी है फिर ये विचार करना आवश्यक है -
१. अंग्रेजियत की गुलामी हम आज भी कर रहे है | देश में आज भी सरकारी नौकरी हो चाहे प्राइवेट दोनों के लिए बिना अंग्रेजी के काम नहीं चलता | बिना अंग्रेजी के हम एक पग भी नहीं चल सकते इस देश में क्यूंकि अंग्रेजी आएगी तभी आप किसी कंपनी में नौकरी पा सकोगे |
२. संस्कारों की गुलामी - आज पश्चिम के संस्कारों की गुलामी में हम इतनी बुरी तरह फंस चुके है कि इससे निकलने का मार्ग ही नहीं दिखता | ये आरम्भ हुआ था नेहरु के ज़माने से और आज हम इसके जाल में पूरी तरह फंस चुके है |
३. भूषा की गुलामी - हमारा अपना पहनावा तो कहीं खो सा गया है हालांकि कुछ समय पहले तक करीब २० वर्ष पहले तक हमारे घरों की बहू बेटियां का परिवेश भारतीयता के अनुरूप था लेकिन अब तो वो भी बदल चुका है|
४. रोटी की गुलामी - आज का हमारा खाना कैसा हो गया है जिसमे फ़ास्ट फ़ूड ने अपना स्थान बना लिया है माँ के परांठो की जगह | फ़ास्ट फ़ूड जो हमें कहीं का नहीं छोड़ता उसने हमको अपना गुलाम बना लिया है | हमको घर के बने खाने से ज्यादा macdonald के बर्गर और dominos के पिज़्ज़ा की आदत पड़ गयी है जो कि हमारी सेहत के लिए बहुत ही खतरनाक है |
५. भेषज की गुलामी - हमारे आयुर्वेद का स्थान आज alopathy ले चुकी है| देश में alopathy को जो स्थान हासिल है वो हमारे आयुर्वेद को नहीं है हालाँकि मोदी सरकार अब इस तरह ध्यान दे रही है और आयुष मंत्रालय अब आयुर्वेद को देश में फिर से प्रतिष्ठापित करने के लिए कृतसंकल्प है |
६. सेकुलरिज्म के कीड़े की गुलामी - आज भारत के ज्यादातर नेता (मोदी विरोधी) और आपके हर युवा के हीरो यानि बॉलीवुड के अभिनेता अभिनेत्री और ये कुछ मीडिया चैनल सभी को सेकुलरिज्म के कीड़े ने अपना गुलाम बना रखा है जिसमे RSS और हिन्दू संस्थाओं को गाली देना ये अपना जन्म सिद्ध अधिकार समझते है | पता नहीं देश इससे कब आज़ाद होगा | लेकिन सोशल मीडिया के राष्ट्रभक्तों की फौज ने इस सेकुलरिज्म के कीड़े की गुलामी को और इनके द्वारा पोषित मीडिया को काफी हद तक कड़ी टक्कर दे रखी है आज|
७. त्योहारों की गुलामी - आज के भारत में हम अपने त्यौहार भी गुलामों की तरह मानाने लग गए है | हमें आज क्रिसमस और अंग्रेजी नव वर्ष और तरह के दिन जैसे फ्रेंडशिप दे mothers दे वैलेंटाइन डे मानना तो याद रहता है लेकिन अपने त्यौहार जैसे होली दिवाली उनका हम माखौल उड़ा रहे है कि दिवाली पर शोर की वजह से पटाखे मत जलाओ और होली पर पानी से मत खेलो और शिवरात्रि पर दूध मत चढाओ शिवलिंग पर | हालांकि कोई भी मीडिया वाला ईद पर बके काटने को कभी गलत नहीं मानता और बलि देना जरुरी समझता है |
सही मायनों में हमारा देश तब ही इस गुलाम मानसिकता से निजात पा सकता है जब हमारे मन पर अंग्रेजियत की काली कालिमा दूर हो जाए और अपने संस्कारों को हम ज्यादा महत्व दे न कि पश्चिम से कॉपी की हुई संस्कारों को |
जिस दिन हर बच्चा गीता के महत्व को समझेगा और वेद की ऋचाओं को आत्मसात करेगा और रामायण महाभारत के चर्चे बॉलीवुड की फिल्मों से ज्यादा होने लगेंगे या बॉलीवुड के अभिनेता अभिनेत्री की जगह हमारे युवाओं के ह्रदय सम्राट देश के वीर सपूत और देश पर मर मिटने वाले और देश के महापुरुष हो जायेंगे तब ही हम कह सकेंगे कि हाँ हमें सही अर्थों में आज़ादी हासिल हुई है नहीं तो ये आज़ादी आधी अधूरी ही कहलाएगी |
ये आज़ादी जो कि आज़ादी न होकर सिर्फ और सिर्फ सत्ता का हस्तांतरण मात्र था ब्रिटिश हुकूमत से नेहरु जैसे काले अंग्रेजों के हाथो में, उसको हम स्वतंत्रता तभी कहेंगे जब देश उपर लिखी गुलामी की जंजीरों को तोड़ कर एक नया आगाज़ करेगा |
ॐ शांति
क्या हम आज भी गुलामी के बेड़ियों में जकड़े नहीं है ?
कौन कौन सी गुलामी है फिर ये विचार करना आवश्यक है -
१. अंग्रेजियत की गुलामी हम आज भी कर रहे है | देश में आज भी सरकारी नौकरी हो चाहे प्राइवेट दोनों के लिए बिना अंग्रेजी के काम नहीं चलता | बिना अंग्रेजी के हम एक पग भी नहीं चल सकते इस देश में क्यूंकि अंग्रेजी आएगी तभी आप किसी कंपनी में नौकरी पा सकोगे |
२. संस्कारों की गुलामी - आज पश्चिम के संस्कारों की गुलामी में हम इतनी बुरी तरह फंस चुके है कि इससे निकलने का मार्ग ही नहीं दिखता | ये आरम्भ हुआ था नेहरु के ज़माने से और आज हम इसके जाल में पूरी तरह फंस चुके है |
३. भूषा की गुलामी - हमारा अपना पहनावा तो कहीं खो सा गया है हालांकि कुछ समय पहले तक करीब २० वर्ष पहले तक हमारे घरों की बहू बेटियां का परिवेश भारतीयता के अनुरूप था लेकिन अब तो वो भी बदल चुका है|
४. रोटी की गुलामी - आज का हमारा खाना कैसा हो गया है जिसमे फ़ास्ट फ़ूड ने अपना स्थान बना लिया है माँ के परांठो की जगह | फ़ास्ट फ़ूड जो हमें कहीं का नहीं छोड़ता उसने हमको अपना गुलाम बना लिया है | हमको घर के बने खाने से ज्यादा macdonald के बर्गर और dominos के पिज़्ज़ा की आदत पड़ गयी है जो कि हमारी सेहत के लिए बहुत ही खतरनाक है |
५. भेषज की गुलामी - हमारे आयुर्वेद का स्थान आज alopathy ले चुकी है| देश में alopathy को जो स्थान हासिल है वो हमारे आयुर्वेद को नहीं है हालाँकि मोदी सरकार अब इस तरह ध्यान दे रही है और आयुष मंत्रालय अब आयुर्वेद को देश में फिर से प्रतिष्ठापित करने के लिए कृतसंकल्प है |
६. सेकुलरिज्म के कीड़े की गुलामी - आज भारत के ज्यादातर नेता (मोदी विरोधी) और आपके हर युवा के हीरो यानि बॉलीवुड के अभिनेता अभिनेत्री और ये कुछ मीडिया चैनल सभी को सेकुलरिज्म के कीड़े ने अपना गुलाम बना रखा है जिसमे RSS और हिन्दू संस्थाओं को गाली देना ये अपना जन्म सिद्ध अधिकार समझते है | पता नहीं देश इससे कब आज़ाद होगा | लेकिन सोशल मीडिया के राष्ट्रभक्तों की फौज ने इस सेकुलरिज्म के कीड़े की गुलामी को और इनके द्वारा पोषित मीडिया को काफी हद तक कड़ी टक्कर दे रखी है आज|
७. त्योहारों की गुलामी - आज के भारत में हम अपने त्यौहार भी गुलामों की तरह मानाने लग गए है | हमें आज क्रिसमस और अंग्रेजी नव वर्ष और तरह के दिन जैसे फ्रेंडशिप दे mothers दे वैलेंटाइन डे मानना तो याद रहता है लेकिन अपने त्यौहार जैसे होली दिवाली उनका हम माखौल उड़ा रहे है कि दिवाली पर शोर की वजह से पटाखे मत जलाओ और होली पर पानी से मत खेलो और शिवरात्रि पर दूध मत चढाओ शिवलिंग पर | हालांकि कोई भी मीडिया वाला ईद पर बके काटने को कभी गलत नहीं मानता और बलि देना जरुरी समझता है |
सही मायनों में हमारा देश तब ही इस गुलाम मानसिकता से निजात पा सकता है जब हमारे मन पर अंग्रेजियत की काली कालिमा दूर हो जाए और अपने संस्कारों को हम ज्यादा महत्व दे न कि पश्चिम से कॉपी की हुई संस्कारों को |
जिस दिन हर बच्चा गीता के महत्व को समझेगा और वेद की ऋचाओं को आत्मसात करेगा और रामायण महाभारत के चर्चे बॉलीवुड की फिल्मों से ज्यादा होने लगेंगे या बॉलीवुड के अभिनेता अभिनेत्री की जगह हमारे युवाओं के ह्रदय सम्राट देश के वीर सपूत और देश पर मर मिटने वाले और देश के महापुरुष हो जायेंगे तब ही हम कह सकेंगे कि हाँ हमें सही अर्थों में आज़ादी हासिल हुई है नहीं तो ये आज़ादी आधी अधूरी ही कहलाएगी |
ये आज़ादी जो कि आज़ादी न होकर सिर्फ और सिर्फ सत्ता का हस्तांतरण मात्र था ब्रिटिश हुकूमत से नेहरु जैसे काले अंग्रेजों के हाथो में, उसको हम स्वतंत्रता तभी कहेंगे जब देश उपर लिखी गुलामी की जंजीरों को तोड़ कर एक नया आगाज़ करेगा |
ॐ शांति