अभी ये तो पूर्ण रूप से कोई भी नहीं जानता कि २३ जनवरी २०१६ को जब नेताजी सम्बन्धी फाइल खुलेंगी तब नेहरु गाँधी परिवार की सभी नेताजी के प्रति की गयी ज्यादतियों को वो उजागर कर पायेगी कि नहीं लेकिन एक आशा की किरण जरुर दिखती है प्रधान मोदी जी के इस घोषणा के बाद |
नेहरु ने हमारी आज़ादी को जो हमें 1947 में प्राप्त हुई थी इस तरह प्रचारित प्रसारित करवाया था कि जैसे आजादी हमें अंग्रेजों की दया के कारण मिल गयी वो भी बिना लड़े ही लेकिन सच्चाई कुछ और ही थी | आज़ादी पाने के लिए इस देश के जनमानस ने 1857 से लेकर 1947 तक संघर्ष किया है, कभी १८५७ के ग़दर के रूप में या कभी तरह तरह के आंदोलनों के रूप में जिसने ४ लाख से ज्यादा कुर्बानियां दी गयी है | हम सिर्फ कुछ लोगो को ही जानते है जिन्होंने आज़ादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी जिनमे भगत सिंह / चन्द्र शेखर आज़ाद आदि का नाम लिया जाता है, लेकिन इनके अलावा भी ऐसे बहुत से स्वतंत्रता वीर थे जिनके नाम हम जानते नहीं है |
सरकार को
प्रयास करके नेताजी के आलावा भी उन सभी वीरो का परिचय देश की जनता से
करवाना चाहिए, जिससे उन्होंने जो अपना सर्वोच्च बलिदान देश के लिए दिया
उसको सच्ची श्रद्धांजलि देश की जनता अर्पित कर सके |
आज़ादी के लिए आज़ाद हिन्द फौज के संघर्ष और योगदान को भुला दिया गया और नेहरु की वजह से इस फौज के सेनानियों वो सम्मान नहीं मिल पाया जिसके वो हकदार थे | आज मोदी सरकार को आज़ाद हिन्द फौज के सिपाहियों को उनका सम्मान देना चाहिए |
हाँ इसको एक शुरुआत नेताजी की सच्चाई सामने आने से हो जाएगी बस ये ही कहा जा सकता है अभी तो |
ॐ शांति
आज़ादी के लिए आज़ाद हिन्द फौज के संघर्ष और योगदान को भुला दिया गया और नेहरु की वजह से इस फौज के सेनानियों वो सम्मान नहीं मिल पाया जिसके वो हकदार थे | आज मोदी सरकार को आज़ाद हिन्द फौज के सिपाहियों को उनका सम्मान देना चाहिए |
हाँ इसको एक शुरुआत नेताजी की सच्चाई सामने आने से हो जाएगी बस ये ही कहा जा सकता है अभी तो |
ॐ शांति
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